भारतीय रक्षा तन्त्र.....
भारत की समन्वित रक्षा प्रणाली एक आधुनिक राष्ट्र की संप्रभुता, स्वतन्त्रता की आंकाक्षाओं की पूर्ति करती है। हम सम्पूर्ण रक्षा तन्त्र को पाँच मुख्य भागों में विभाजित कर सकते है।
थल सेना
वायु सेना
जल सेना
परमाणु कमांड
साइबर कमांड
थल सेना जहाँ अत्याधुनिक तकनीकियों से लैस विश्व की प्रमुख सेनाओं में से एक है वहीं नौसेना एंव वायु सेना भी दुश्मन राष्ट्र को चुनौती देने का माद्दा रखती है। परमाणु कमांड आणविक अस्त्रों की निगरानी हेतु स्थापित की गयी है वहीं साइबर कमांड की स्थापना समन्वित रक्षा तंत्र की प्राप्ति हेतु की जा रही है।
भारतीय प्रतिरक्षा प्रणाली को स्वदेश निर्मित प्रक्षेपास्त्रो से लैस करने के लिये 1983 में एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम की शुरूआत की गयी थी।इसके तहत पाँच प्रक्षेपास्त्रों का विकास किया गया जिनमें त्रिशूल प्रक्षेपास्त्र कार्यक्रम को 2008 में बंद कर दिया गया है।
क्रमश:
भारत की समन्वित रक्षा प्रणाली एक आधुनिक राष्ट्र की संप्रभुता, स्वतन्त्रता की आंकाक्षाओं की पूर्ति करती है। हम सम्पूर्ण रक्षा तन्त्र को पाँच मुख्य भागों में विभाजित कर सकते है।
थल सेना
वायु सेना
जल सेना
परमाणु कमांड
साइबर कमांड
थल सेना जहाँ अत्याधुनिक तकनीकियों से लैस विश्व की प्रमुख सेनाओं में से एक है वहीं नौसेना एंव वायु सेना भी दुश्मन राष्ट्र को चुनौती देने का माद्दा रखती है। परमाणु कमांड आणविक अस्त्रों की निगरानी हेतु स्थापित की गयी है वहीं साइबर कमांड की स्थापना समन्वित रक्षा तंत्र की प्राप्ति हेतु की जा रही है।
भारतीय प्रतिरक्षा प्रणाली को स्वदेश निर्मित प्रक्षेपास्त्रो से लैस करने के लिये 1983 में एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम की शुरूआत की गयी थी।इसके तहत पाँच प्रक्षेपास्त्रों का विकास किया गया जिनमें त्रिशूल प्रक्षेपास्त्र कार्यक्रम को 2008 में बंद कर दिया गया है।
क्रमश: